बरसात में भी नहीं थम रहा अवैध रेत का कारोबार, जैतपुर में बेखौफ माफिया—मूक पशुओं की जान पर बन आई
जैतपुर, शहडोल। जिले में मानसून के दौरान भी अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का काला कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है। जैतपुर क्षेत्र में दिन-रात रेत से लदे भारी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध रेत परिवहन में लगे ट्रकों और हाईवा की तेज रफ्तार के कारण कई गायें और अन्य मूक पशु कुचले जा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
नियमों को धता बताते हुए नदी घाटों से लगातार रेत निकाली जा रही है। बरसात के मौसम में, जब खनन पर विशेष निगरानी और सख्ती अपेक्षित होती है, तब भी अवैध कारोबार बेखौफ जारी रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या रेत माफियाओं में कानून का कोई डर नहीं बचा है? क्या जिले के नए पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है? यदि कार्रवाई हो रही है, तो फिर अवैध रेत से लदे वाहन लगातार सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं?
अवैध रेत खनन केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि पर्यावरण, नदी तंत्र और आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। तेज रफ्तार भारी वाहनों से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है और मूक पशु इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग से मांग की है कि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई हो तथा ऐसे मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाकर आमजन और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सूत्रों के अनुसार बड़े साहब का भी महिना फिक्स होगा है अब साहब से कोई दिक्कत नहीं क्यों कि सुरक्षा कर्मी सभी सुरक्षा का जिम्मेदारी कंधों पर और पीठ पर चलने की जिम्मा जो है और छोटे साहब की तो बात छोड़ो छोटे साहब का तो fix ही था साहब कितने भी नियम कानून बताये पर ऑपरेटर तो है नियम तोड़ ही देते हैं जल्द ही बड़ा खुलासा के साथ फिर मिलेंगे
खबर टैप" इस पूरे मामले के दस्तावेज़ी और तथ्यात्मक पक्ष की पड़ताल कर रहा है। यदि किसी अधिकारी या संबंधित कर्मचारी का पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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