Updated On: 20 Aug, 2026

जैतपुर बस स्टैंड में स्वच्छ भारत मिशन की खुली पोल! सार्वजनिक शौचालय बदहाल, चारों तरफ कचरा और कीचड़—नगर पंचायत की घोषणा तो हो गई, लेकिन सफाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी

जैतपुर। सरकार स्वच्छ भारत मिशन के जरिए गांव-कस्बों को साफ-सुथरा बनाने, खुले में शौच की प्रवृत्ति रोकने और आम नागरिकों को मूलभूत स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है। लेकिन जैतपुर बस स्टैंड की जमीनी तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
जैतपुर बस स्टैंड में बना सार्वजनिक शौचालय अपनी बदहाली पर आंसू बहाता दिखाई दे रहा है। शौचालय के आसपास गंदगी, कीचड़, बिखरा कचरा और अव्यवस्थित नालियों जैसी स्थिति आम यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। तस्वीरें बताती हैं कि जिस स्थान पर यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित शौच सुविधा मिलनी चाहिए, वहां स्वच्छता व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में है।
बारिश ने खोल दी व्यवस्था की असली तस्वीर
बरसात का मौसम शुरू होते ही बस स्टैंड परिसर की हालत और भी खराब नजर आ रही है। जगह-जगह कीचड़, गंदगी और कचरा जमा है। बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को इसी गंदे माहौल से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि सार्वजनिक शौचालय के सामने ही यदि गंदगी और जलभराव का आलम हो, तो स्वच्छ भारत मिशन के दावों का क्या मतलब रह जाता है?
शौचालय बना, लेकिन सुविधा कहां?
सरकारी योजनाओं के तहत सार्वजनिक शौचालयों का उद्देश्य ही यही है कि बाजार, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिकों को स्वच्छ एवं उपयोगी शौच सुविधा मिल सके।
लेकिन जैतपुर में स्थिति देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सिर्फ भवन बना देना ही स्वच्छ भारत मिशन की सफलता है?
शौचालय की नियमित सफाई कौन करेगा?
पानी की व्यवस्था कौन देखेगा?
परिसर में जमा गंदगी कौन हटाएगा?
नालियों की सफाई कब होगी?
और बरसात में जलभराव रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
नगर पंचायत की घोषणा के बाद ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी खत्म?
जैतपुर को नगर पंचायत बनाए जाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन जब तक संबंधित क्षेत्र का विधिवत प्रशासनिक हस्तांतरण और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।
अगर बस स्टैंड एवं वहां बने सार्वजनिक शौचालय की जिम्मेदारी अभी ग्राम पंचायत के अधीन है, तो ग्राम पंचायत को सामने आकर जवाब देना चाहिए कि सफाई व्यवस्था की यह हालत क्यों है और नियमित साफ-सफाई के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
और यदि अब इसकी जिम्मेदारी नगर पंचायत अथवा किसी अन्य निकाय को हस्तांतरित हो चुकी है, तो संबंधित विभाग को भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
घोषणा और जिम्मेदारी के बीच आम जनता को पिसने नहीं दिया जा सकता।
बस स्टैंड या गंदगी का अड्डा?
जैतपुर बस स्टैंड केवल स्थानीय लोगों के आवागमन का स्थान नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले सैकड़ों लोगों के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है। ऐसे स्थान की साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाएं किसी भी स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
लेकिन मौके की तस्वीरों में कचरे का बिखराव, कीचड़, गंदा परिसर और खुले में घूमते गौवंश व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
यह स्थिति केवल सफाई कर्मचारियों की लापरवाही का मामला नहीं है। यह सवाल जवाबदेही, निगरानी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का भी है।
कागजों में स्वच्छता, जमीन पर गंदगी!
मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ODF की निरंतरता, ठोस अपशिष्ट और ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है।
ऐसे में जैतपुर बस स्टैंड की यह तस्वीरें प्रशासन के लिए आईना हैं।
एक तरफ स्वच्छता के नाम पर योजनाएं, अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं, दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थान पर गंदगी का यह आलम क्यों?
अब जवाब चाहिए
जैतपुर के नागरिकों की मांग है कि प्रशासन तत्काल बस स्टैंड का निरीक्षण करे और—
सार्वजनिक शौचालय की नियमित सफाई सुनिश्चित कराई जाए।
शौचालय में पानी, प्रकाश एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
बस स्टैंड परिसर से कचरा तत्काल हटाया जाए।
नालियों की सफाई कर बरसात में जलभराव की समस्या दूर की जाए।
खुले में घूम रहे गौवंश के संबंध में उचित व्यवस्था की जाए।
बस स्टैंड की सफाई के लिए जिम्मेदार विभाग/निकाय की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।
यदि शौचालय के निर्माण अथवा रखरखाव में सरकारी राशि खर्च हुई है, तो उसकी उपयोगिता और रखरखाव की भी जांच हो।
जैतपुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा विकास की उम्मीद जगाती है, लेकिन सिर्फ नाम बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। जनता को साफ-सफाई, शौचालय, जलनिकासी और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान जैसी बुनियादी सुविधाएं जमीन पर चाहिए।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर भी आंखें बंद रखते हैं या फिर बस स्टैंड की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए मौके पर उतरते हैं।
सवाल सीधा है—
स्वच्छ भारत मिशन का सपना जैतपुर में कागजों पर पूरा हुआ या जमीन पर भी?
और आखिर बस स्टैंड की इस बदहाली का जिम्मेदार कौन है