Updated On: 23 Aug, 2026

जैतपुर में अवैध पैकारी पर तहसीलदार की बड़ी कार्रवाई, 30 लीटर शराब और बाइक जब्त

देशी-विदेशी मदिरा दुकान से गांव-गांव पैकारी के आरोप, तहसीलदार ने रंगे हाथ पकड़ा; शराब दुकान की लोकेशन और नियमों के पालन पर भी उठे गंभीर सवाल
जैतपुर। जैतपुर क्षेत्र में शराब की कथित अवैध पैकारी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार जैतपुर तहसीलदार द्वारा कार्रवाई करते हुए दो व्यक्ति को कथित रूप से अवैध तरीके से शराब की पैकारी करते पकड़ा गया। मौके से करीब 30 लीटर शराब और एक टू-व्हीलर वाहन जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत शराब की मात्रा व प्रकार के आधार पर लगभग 20 से 30 हजार रुपये बताई जा रही है। जब्त शराब और वाहन को आगे की कार्रवाई के लिए थाना जैतपुर पुलिस को सुपुर्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब लाइसेंसी दुकान से निकलकर गांव-गांव पहुंच रही थी, तो आखिर लाइसेंसी दुकान से शराब की बिक्री और उसके बाद परिवहन की निगरानी कौन कर रहा था?
क्या लाइसेंस दुकान से निकलकर गांवों तक पहुंच रही है शराब?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जैतपुर की देशी-विदेशी मदिरा दुकान से कथित रूप से शराब की पैकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाती है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल किसी एक व्यक्ति के पास शराब मिलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शराब के स्रोत, बिक्री, परिवहन और लाइसेंसी दुकान की भूमिका की भी जांच आवश्यक होगी।
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम में शराब की बिक्री, परिवहन, कब्जे तथा लाइसेंस की शर्तों को नियंत्रित करने के लिए प्रावधान हैं। लाइसेंसधारी द्वारा लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन होने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
तहसीलदार की कार्रवाई से उठे कई बड़े सवाल
तहसीलदार द्वारा मौके पर कार्रवाई किए जाने के बाद अब आबकारी विभाग के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं—
अगर 30 लीटर शराब गांव में पैकारी के लिए जा रही थी तो शराब दुकान से इसकी बिक्री किसे हुई?
क्या शराब दुकान के बिक्री रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का मिलान होगा?
क्या दुकान से शराब खरीदने वाले व्यक्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
क्या दुकान के CCTV कैमरों की जांच की जाएगी?
क्या पहले भी इसी तरह शराब गांवों तक पहुंचाने की शिकायतें आबकारी विभाग तक पहुंची थीं?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।
नगर के बीचों-बीच शराब दुकान, स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थल को लेकर भी सवाल
दूसरी ओर जैतपुर नगर में शराब दुकान की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बताई जा रही है। लोगों के अनुसार शराब दुकान के आसपास मंदिर, स्कूल और कॉलेज जैसे संवेदनशील स्थान मौजूद हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकान के आसपास आए दिन शराबियों का जमावड़ा, गाली-गलौज और विवाद की स्थिति बनती है। स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं तथा आसपास के रहवासियों को भी कथित रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हालांकि मंदिर, स्कूल या कॉलेज से कितनी दूरी पर शराब दुकान होना वैध है, यह संबंधित वर्ष की मध्यप्रदेश आबकारी नीति, लाइसेंस की स्वीकृत शर्तों और लागू आबकारी नियमों के अनुसार प्रशासनिक रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना चाहिए। इसलिए केवल दूरी के दावे के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आबकारी विभाग द्वारा मौके का आधिकारिक निरीक्षण और माप कराया जाना जरूरी है।
शराब दुकान पर भी हो निष्पक्ष जांच
तहसीलदार की कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल सड़क पर शराब लेकर जाते व्यक्ति तक कार्रवाई सीमित रखेगा, या फिर शराब के वास्तविक स्रोत तक पहुंचेगा?
यदि जांच में यह साबित होता है कि लाइसेंसी दुकान से नियमों के विपरीत शराब की बिक्री अथवा पैकारी कराई जा रही थी, तो संबंधित लाइसेंसधारी के विरुद्ध आबकारी कानून और लाइसेंस की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मध्यप्रदेश आबकारी कानून राज्य सरकार को शराब की बिक्री, परिवहन, लाइसेंस, लाइसेंस की शर्तों और शराब की दुकानों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति देता है। साथ ही लाइसेंसधारी के व्यवसाय और परिसर में अव्यवस्था/अनुचित गतिविधियों की रोकथाम से संबंधित नियंत्रण भी नियमों के माध्यम से किया जा सकता है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शराब दुकान के आसपास लगातार विवाद, गाली-गलौज और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है, तो प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए।
तहसीलदार की कार्रवाई ने यह तो दिखा दिया कि अवैध पैकारी के खिलाफ कार्रवाई संभव है। अब देखना यह है कि आबकारी विभाग शराब के स्रोत तक पहुंचकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करता है या कार्रवाई केवल 30 लीटर शराब और एक बाइक की जब्ती तक सीमित रह जाती है।
जैतपुर की जनता अब प्रशासन से पूछ रही है—
“अगर पैकारी अवैध है तो शराब पहुंचाने वाला पकड़ा गया, लेकिन शराब पहुंची कहां से—इसका जवाब कौन देगा?”
दूसरा सबसे बड़ा सवाल क्या थाने में FIR दर्ज हुआ और हुआ तो आबकारी एक्ट के तहत हुआ और नहीं हुआ तो अभी तक क्यों नहीं हुआ अभी अधिकारी बयान आना बाकी आधिकारिक बयान आते ही सभी मामलों की पुष्टि की जायेगी
जांच हो, बिक्री रजिस्टर खंगाला जाए, CCTV फुटेज देखी जाए, स्टॉक का मिलान कराया जाए और शराब दुकान की निर्धारित लोकेशन व लाइसेंस की सभी शर्तों की मौके पर जांच की जाए—तभी इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।