शहडोल में धान पंजीयन को लेकर किसानों की बढ़ी परेशानी, गिरदावरी दर्ज नहीं होने से अटके पंजीयन; आज आखिरी तारीख, दिनभर केंद्रों पर लगी रही लंबी कतारें
शहडोल में धान पंजीयन को लेकर किसानों की बढ़ी परेशानी, गिरदावरी दर्ज नहीं होने से अटके पंजीयन; आज आखिरी तारीख, दिनभर केंद्रों पर लगी रही लंबी कतारें
**शहडोल, 10 अक्टूबर 2026।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में धान पंजीयन को लेकर किसानों की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। धान पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर होने के कारण किसान सुबह से ही पंजीयन केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन गिरदावरी की जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं होने के चलते कई किसानों को पंजीयन कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपनी खेती-किसानी के जरूरी काम छोड़कर दिनभर पंजीयन केंद्रों पर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
किसानों की परेशानी का मुख्य कारण गिरदावरी का ऑनलाइन रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देना बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जब वे धान पंजीयन केंद्र पहुंचते हैं, तो उनकी जमीन और फसल से संबंधित गिरदावरी की जानकारी सिस्टम में दिखाई नहीं देती। ऐसे में पंजीयन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। किसान जब इस संबंध में पटवारियों से जानकारी लेते हैं, तो उन्हें पटवारियों की हड़ताल चलने की बात बताई जा रही है। इसके कारण गिरदावरी से संबंधित काम प्रभावित होने की शिकायत सामने आ रही है।
आखिरी तारीख पर किसानों के सामने बड़ा संकट
सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को हो रही है, जिनका धान पंजीयन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। 10 अक्टूबर को पंजीयन की अंतिम तारीख होने के कारण किसानों के सामने समय की कमी का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को डर है कि यदि समय रहते उनका पंजीयन नहीं हुआ, तो उन्हें धान बेचने की प्रक्रिया में आगे परेशानी उठानी पड़ सकती है।
पंजीयन केंद्रों पर पहुंच रहे किसान उम्मीद लेकर आते हैं कि उनका काम पूरा हो जाएगा, लेकिन गिरदावरी रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देने के कारण उन्हें निराश होकर इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसान घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। दिनभर लाइन में खड़े रहने के बावजूद काम नहीं होने से किसानों में नाराजगी और चिंता दोनों देखने को मिल रही हैं।
खेती का काम छोड़कर पंजीयन केंद्रों के चक्कर लगा रहे किसान
किसानों के लिए यह समय खेती-किसानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद उन्हें अपनी दूसरी जिम्मेदारियां छोड़कर पंजीयन केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि गिरदावरी समय पर दर्ज हो जाती और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दिखाई देने लगती, तो उन्हें अंतिम दिन इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
एक तरफ पंजीयन की अंतिम तारीख निकलने का डर है, तो दूसरी तरफ तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया में आ रही बाधाओं के कारण किसान असमंजस में हैं। किसानों की परेशानी यह है कि जब उनकी ओर से पंजीयन कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रिकॉर्ड ही ऑनलाइन नहीं दिख रहा, तो वे अपना काम कैसे पूरा कराएं?
प्रशासन से राहत की उम्मीद
शहडोल जिले में धान पंजीयन को लेकर सामने आ रही इस समस्या के बीच किसानों को प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद है। किसानों की मांग है कि गिरदावरी से संबंधित समस्या का जल्द समाधान किया जाए, ताकि जिन किसानों का पंजीयन तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी कारणों से अटका हुआ है, उन्हें राहत मिल सके।
किसानों के हित में यह भी जरूरी है कि अंतिम तारीख के कारण किसी पात्र किसान को केवल गिरदावरी रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं दिखने या प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने की वजह से परेशानी न उठानी पड़े। ऐसे में प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और प्रभावित किसानों के पंजीयन के लिए उचित व्यवस्था करने की अपेक्षा की जा रही है।
फिलहाल, धान पंजीयन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर होने के बीच शहडोल जिले के प्रभावित किसान परेशान हैं। दिनभर पंजीयन केंद्रों पर कतारों में खड़े किसान इस उम्मीद में हैं कि उनकी समस्या का जल्द समाधान होगा और वे समय पर अपना धान पंजीयन पूरा करा सकेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और किसानों को राहत मिल पाती है या नहीं।

Leave a Reply