सोनू की मौत के बाद सड़कों पर उतरी जनता! कुछ लाख का मुआवजा देकर क्या प्रशासन ने लगा दी एक जिंदगी की कीमत? जैतपुर पुलिस और कथित रेत माफिया पर गंभीर सवाल
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शहडोल/जैतपुर/भटिया | मध्य प्रदेश
कल सोनू की जान गई, आज जनता सड़कों पर उतर आई। सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम का है, जिसकी जिम्मेदारी लोगों की जान बचाना है।
मुआवजा देकर क्या खत्म हो गई जिम्मेदारी?
जैतपुर क्षेत्र में सोनू वर्मा की मौत के बाद जनाक्रोश सामने आया। आक्रोशित लोगों के सड़क पर उतरने के बाद प्रशासन की ओर से कुछ लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आर्थिक सहायता ही इंसाफ है? क्या मुआवजा देने के बाद लापरवाही की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? सोनू के परिवार को सहायता चाहिए, लेकिन उससे भी ज्यादा सच और न्याय चाहिए।
नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु, फिर सड़क पर बेलगाम हाइवा कैसे?
भटिया में नवरात्रि के नौ दिनों तक रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में भारी वाहनों पर निगरानी की व्यवस्था क्या थी? आखिर 12 चक्का हाइवा मुख्य सड़क पर कैसे पहुंचा? क्या उसमें रेत लदी थी? वाहन कहां से आया और किस ठिकाने की ओर जा रहा था? जिस सड़क पर पुलिस की मौजूदगी रहती है, वहां से संदिग्ध वाहन गुजरता है तो उसकी जांच कौन करता है?
अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? क्या मिलीभगत की भी होगी जांच?
जैतपुर क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप उठते रहे हैं। ऐसे में पुलिस, तहसीलदार, SDM और खनिज विभाग की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी थी? यदि थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो इतनी बड़ी प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही थी? इन सवालों से बचने के बजाय प्रशासन को रिकॉर्ड और कार्रवाई के आंकड़ों के साथ जवाब देना होगा।
मवेशी तस्करी से लेकर गांजा और अवैध रेत तक, पुलिस की कार्रवाई का हिसाब कौन देगा?
क्षेत्र में मवेशियों के कथित अवैध परिवहन, गांजा तस्करी, चोरी, डकैती और अन्य अपराधों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे मामलों में कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी FIR दर्ज हुईं और कितने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई? जनता को यह जानने का अधिकार है। पुलिस और अपराधियों की कथित मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच सामने आए।
सोनू की मौत आखिरी चेतावनी बने, अगली त्रासदी का इंतजार नहीं!
ख़बर TAP का कलेक्टर शहडोल से सीधा सवाल है—क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होगी? क्या ट्रक की आवाजाही, वाहन दस्तावेज, संभावित अवैध परिवहन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही जांची जाएगी? क्योंकि मुआवजा किसी जिंदगी की कीमत नहीं होता। सोनू अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन सच सामने लाकर किसी दूसरे सोनू की जान जरूर बचाई जा सकती है।
जैतपुर की जनता का सवाल—हमें सिर्फ मुआवजा नहीं, जवाब और इंसाफ चाहिए!
KHABARTAP | सच की तरफ, जनता के साथ।

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