बिहार चुनाव 2025: महिलाओं, छात्रों और युवाओं के लिए दलों की वादों की जंग, किसने क्या कहा?
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पहले चरण के मतदान से पहले राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है। सत्ता पक्ष राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस आदि) के बीच मुकाबला सीधा माना जा रहा है। इस बार दलों का फोकस खास तौर पर महिलाओं, छात्रों और युवाओं पर है।
छात्रों के लिए योजनाएं:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 12वीं, ITI और स्नातक पास छात्रों को इंटर्नशिप के दौरान ₹4,000 से ₹6,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं तेजस्वी यादव ने 2,000 एकड़ में एक बड़े विश्वविद्यालय की स्थापना, स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी और स्कूली बच्चों को भोजन में एक गिलास दूध और दो अंडे देने का वादा किया है। जनसुराज के प्रशांत किशोर और आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी शिक्षा और रोजगार से जुड़ी कई घोषणाएं की हैं।
महिलाओं को लेकर घोषणाएं:
महिलाओं के लिए लगभग सभी दलों ने आर्थिक सहायता योजनाओं की घोषणा की है। AAP ने ‘मैया सम्मान योजना’ के तहत हर महिला को ₹3,000 प्रति माह देने का वादा किया है। तेजस्वी यादव की ‘माई-बहिन योजना’ में महिलाओं को ₹2,500 प्रति माह और ₹500 में गैस सिलेंडर देने की बात कही गई है। NDA सरकार ने 1.21 करोड़ ‘जीविका दीदियों’ को ₹10,000 की आर्थिक मदद दी है और आगे ₹2 लाख तक की सहायता का वादा किया है। आशा और ममता कार्यकर्ताओं का मानदेय भी बढ़ाया गया है।
युवाओं के लिए रोजगार के वादे:
रोजगार बिहार के चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नीतीश कुमार ने अगले पांच साल में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का ऐलान किया है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने “हर घर में एक सरकारी नौकरी” देने का वादा किया है। प्रशांत किशोर ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो युवाओं को नौकरी की तलाश में राज्य छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
NDA की अन्य योजनाएं:
NDA ने महिलाओं, वृद्धों और विकलांगों की पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1,100 कर दी है। 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने और स्नातक बेरोजगार युवाओं को दो साल तक ₹1,000 प्रतिमाह देने का वादा भी किया गया है।
अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक घोषणा पत्र जारी नहीं किया है, लेकिन वादों की इस होड़ ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

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