अचानक क्यों बढ़ाई गई शिवराज की सुरक्षा? BJP अध्यक्ष की कुर्सी से जुड़ा बड़ा संकेत!
भोपाल/दिल्ली:
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर सियासी सुर्खियों के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनके भोपाल और दिल्ली स्थित आवासों की सुरक्षा में की गई अचानक बढ़ोतरी है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संकेत छिपा है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय को मिले कुछ खुफिया इनपुट के बाद शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा की समीक्षा की गई। इसके बाद भोपाल के 74 बंगला स्थित उनके आवास और दिल्ली स्थित निवास पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। बैरिकेड्स लगाए गए हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को औपचारिक पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डीजीपी को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।
हालांकि सुरक्षा बढ़ाए जाने के पीछे आधिकारिक वजह संभावित खतरे और खुफिया अलर्ट को बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ संयोग मानने को तैयार नहीं हैं। दरअसल, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं। मौजूदा अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और पार्टी संगठन नए नेतृत्व की तलाश में है। ऐसे समय में शिवराज सिंह चौहान का नाम बार-बार सामने आना इन चर्चाओं को और बल दे रहा है।
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी बड़े फैसले से पहले सुरक्षा व्यवस्था में इजाफा हुआ हो। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनके आवास के बाहर इसी तरह की सख्ती देखी गई थी। यही वजह है कि इस बार भी सुरक्षा बढ़ने को संभावित संगठनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और स्वीकार्यता के लिहाज से शिवराज का नाम मजबूत माना जा रहा है।
खुद शिवराज सिंह चौहान इन तमाम अटकलों पर खुलकर कुछ कहने से बचते नजर आ रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर वे लगातार यही दोहराते रहे हैं कि उनका पूरा ध्यान कृषि मंत्रालय और किसानों से जुड़े कार्यों पर केंद्रित है। बावजूद इसके, राजनीति में अक्सर देखा गया है कि जिन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वही अंततः बड़े फैसलों का हिस्सा बनते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि शिवराज सिंह चौहान की बढ़ी सुरक्षा महज एहतियात साबित होती है या फिर यह बीजेपी संगठन में किसी बड़े बदलाव की आहट है। फिलहाल, सुरक्षा के साथ-साथ सस्पेंस भी पूरी तरह बरकरार है।

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