Updated On: 07 May, 2026

श्रीराम हॉस्पिटल बना अव्यवस्थाओं का केंद्र! मेन रोड पर रोजाना जाम, जनता परेशान—प्रशासन आखिर कब जागेगा

क्षेत्र के चर्चित निजी अस्पताल श्रीराम हॉस्पिटल को लेकर अब स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। अस्पताल के बाहर फैली अव्यवस्था ने न सिर्फ यातायात व्यवस्था को चौपट कर दिया है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थिति यह है कि अस्पताल के सामने से गुजरने वाला मुख्य मार्ग दिनभर जाम की चपेट में रहता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल आने-जाने वाले वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग के कारण सड़क सिकुड़ चुकी है। दोपहिया से लेकर भारी वाहन तक घंटों फंसते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार एम्बुलेंस तक जाम में फंस जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
पार्किंग नहीं, सड़क ही बना दी “अस्थायी स्टैंड”
आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पार्किंग व्यवस्था के नाम पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। न तो वाहनों के लिए अलग पार्किंग स्थल विकसित किया गया और न ही ट्रैफिक नियंत्रण के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती की गई। नतीजा यह कि सड़क किनारे बेतरतीब खड़ी गाड़ियों ने आम लोगों का चलना तक मुश्किल कर दिया है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। राहगीरों और स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
जनता पूछ रही—क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं?
अब लोगों के बीच कई बड़े सवाल चर्चा का विषय बन चुके हैं—
क्या बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई?
आखिर ट्रैफिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन किसके संरक्षण में हो रहा है?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
यदि आम नागरिक सड़क पर वाहन खड़ा करे तो चालान, लेकिन यहां कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के हवाले से कई और मामलों की चर्चा
सूत्रों की मानें तो मामला सिर्फ जाम और पार्किंग तक सीमित नहीं है। अस्पताल से जुड़े कई अन्य गंभीर मामलों की भी चर्चा क्षेत्र में तेजी से हो रही है, जिनकी जांच होने पर बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। स्थानीय नागरिक अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों हैं? लगातार बढ़ती अव्यवस्था के बावजूद न तो ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के प्रयास दिख रहे हैं और न ही अस्पताल प्रबंधन पर कोई सख्त कार्रवाई।
अब देखना होगा कि प्रशासन जनता की परेशानी को गंभीरता से लेकर व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी केवल शिकायतों और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा।