Updated On: 21 Jul, 2026

UCC विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बना मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और असम में पहले हो चुका है पास

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को हंगामे और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस के दौरान समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पारित कर दिया गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश UCC विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम की विधानसभाओं में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक पारित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधेयक पारित होने को मध्य प्रदेश के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में राम से रहीम, रविंदर से रॉबिन, अमर से अकबर और एंथोनी तक सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जनपरामर्श के दौरान 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने UCC का समर्थन किया।

मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा को मजबूत करेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में एक से अधिक विवाह करना अपराध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को बहुविवाह और अन्य शोषणकारी प्रथाओं से होने वाले कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संबंधों का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि UCC लागू होने के बाद महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि कोई पुरुष चार विवाह नहीं कर सकेगा और हलाला जैसी प्रथाएं समाप्त होंगी। उनके अनुसार कानून से सभी महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिलेगा।

वहीं, कांग्रेस ने विधेयक का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि इसके कुछ प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 के तहत मिले धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं।

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को यूनिफॉर्म सिविल कोड से पहले यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड और यूनिफॉर्म हेल्थ कोड की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आरक्षण, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।

विधानसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। सरकार ने UCC को महिला सशक्तीकरण, समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने विधेयक के प्रावधानों और इसे पारित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने 19 जुलाई 2026 को UCC विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी और इसे मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया गया था।