Updated On: 05 Aug, 2026

क्या यही हैं BJP के रखवाले? माफी मांग चुकी 15 साल की बच्ची को रेप और तेज़ाब हमले की धमकियों का आरोप

प्रधानमंत्री ने माफ किया, लेकिन कथित समर्थकों का गुस्सा नहीं थमा; डर से घर छोड़ने को मजबूर नाबालिग का परिवार
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाली 15 वर्षीय छात्रा ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार कर पूरे देश से माफी मांग ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीडियो संदेश जारी कर उसे “गुमराह बच्ची” बताते हुए माफ करने की बात कही। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली, लेकिन इसके बावजूद नाबालिग और उसके परिवार को कथित तौर पर मिल रही जानलेवा धमकियों का सिलसिला समाप्त नहीं हुआ।

लड़की का आरोप है कि उसकी वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिया गया। इसके बाद उसे फोन, मैसेज और सोशल मीडिया के माध्यम से रेप करने, हत्या करने तथा चेहरे पर तेज़ाब फेंकने जैसी धमकियां मिलने लगीं। उसके लिए कथित रूप से इनाम घोषित करने और बेहद अश्लील टिप्पणियां करने के आरोप भी सामने आए हैं। इन धमकियों के कारण तीन सदस्यों वाला परिवार अपना घर छोड़कर छिपते हुए जीवन बिताने को मजबूर है। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को अब यह भी नहीं मालूम कि वह अपनी बोर्ड परीक्षा दे पाएगी या नहीं। फैशन डिजाइनर और मेकअप आर्टिस्ट बनने का सपना देखने वाली बच्ची के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल अपना और अपने परिवार का जीवन बचाना है।

मामला अब केवल एक वायरल वीडियो या अभद्र भाषा तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि किसी नेता के सम्मान की रक्षा के नाम पर एक नाबालिग को रेप और एसिड अटैक की धमकी देना किस तरह का राजनीतिक समर्थन है? क्या यही वे लोग हैं जो खुद को भारतीय संस्कृति, महिला सम्मान और राष्ट्रवाद का रखवाला बताते हैं? लड़की की भाषा गलत थी और उसकी आलोचना होनी चाहिए। लेकिन किसी गलती की सजा ऑनलाइन भीड़ तय नहीं कर सकती। कानून किसी व्यक्ति को धमकाने, उसका नंबर सार्वजनिक करने या यौन हिंसा की धमकी देने की अनुमति नहीं देता। नाबालिग से गलती हुई, उसने माफी मांगी और प्रधानमंत्री ने माफ करने की घोषणा भी की। इसके बाद भी उसे आतंकित करना किसी राजनीतिक निष्ठा का नहीं, बल्कि आपराधिक मानसिकता का प्रमाण है।

हालांकि धमकी देने वाले लोगों की वास्तविक पहचान और किसी राजनीतिक दल से उनके औपचारिक संबंध की पुष्टि होना अभी आवश्यक है। केवल सोशल मीडिया प्रोफाइल या प्रधानमंत्री के समर्थन में लिखी पोस्ट के आधार पर पूरी बीजेपी अथवा उसके सभी समर्थकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन खुद को प्रधानमंत्री समर्थक बताने वाले जिन खातों से धमकियां दी गईं, उनकी जांच और पहचान करना पुलिस की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री की माफी तभी सार्थक दिखाई देगी, जब सरकार और पुलिस उस बच्ची तथा उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें। धमकी देने वाले फोन नंबरों और सोशल मीडिया खातों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतंत्र में अपशब्दों का जवाब आलोचना और कानून से दिया जाता है—रेप, हत्या और तेज़ाब हमले की धमकियों से नहीं। किसी नेता की भक्ति में एक बच्ची को घर छोड़ने पर मजबूर कर देना समर्थन नहीं, कानून और इंसानियत दोनों का अपमान है।