Updated On: 12 Oct, 2025

बिहार में NDA का सीट बंटवारा फाइनल — पर क्या अंदरखाने सब ठीक है?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों का बंटवारा आखिरकार तय हो गया है। नई दिल्ली में कई दिनों की लंबी बैठकों के बाद भाजपा और जेडीयू के बीच बराबरी का फॉर्मूला तय किया गया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में अब भी सवाल गूंज रहा है — क्या ये समझौता वाकई सहज है या कुछ दबा हुआ असंतोष आगे विस्फोट करेगा?
तय फॉर्मूले के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। वहीं चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) को 6-6 सीटें दी गई हैं।
भले ही सभी दलों ने इसे “सौहार्दपूर्ण समझौता” बताया हो, लेकिन अंदरखाने की खबरें बताती हैं कि जेडीयू के कुछ नेता ‘बराबरी के फॉर्मूले’ से असंतुष्ट हैं। पहले यह चर्चा थी कि नीतीश कुमार की पार्टी को ‘बड़े भाई’ का दर्जा मिलेगा और भाजपा से कुछ सीटें अधिक दी जाएंगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। अब यह बराबरी का फार्मूला राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
2020 के चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 74 सीटें जीती थीं, जबकि जेडीयू को 115 सीटों में से सिर्फ 43 पर जीत मिली थी। एलजेपी उस वक्त अकेले मैदान में उतरी थी और केवल एक सीट जीत पाई थी। इस बार NDA की रणनीति पूरी तरह नए समीकरण पर टिकी है।
भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “हमने सहयोगियों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में सीट बंटवारा किया है। बिहार है तैयार, फिर से NDA सरकार।” वहीं चिराग पासवान ने भी इसे NDA की मजबूती बताया।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि “बराबरी” के इस समझौते के पीछे कई अनकहे समीकरण हैं। अब देखना यह होगा कि क्या यह एकता चुनाव तक बनी रहती है या यह गठबंधन फिर किसी नए मोड़ पर बिखराव की ओर बढ़ेगा।